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हिमाचल में OPS नहीं ,बागी बने भाजपा की हार का कारण!

लेकिन कांग्रेस की जीत मे OPS की महत्वपूर्ण भूमिका

हिमाचल डेस्क – हिमाचल प्रदेश विधानसभा का 2022 का चुनाव बहुत ही दिलचस्प था एक तरफ विश्व का सबसे बड़ा राजनीतिक दल भारतीय जनता पार्टी और उसके सामने दूसरी तरफ जीर्ण अवस्था में 137 पुरानी कांग्रेस ।भाजपा यूपी और उत्तराखंड में कांग्रेस को धराशाई कर उत्साह और ऊर्जा से लबरेज हिमाचल में रिवाज बदलने के लिए आतुर अपनी पूरी ताकत के साथ चुनावी मैदान में डटी वहीं कांग्रेस हिमाचल में बिना नेता और संसाधनों के लिए जूझती हुई अपने फूटसोल्जर व ओ पी एस के सारे मैदान में उतरी। समूचे चुनाव अभियान में भाजपा ने कई मुद्दों और समीकरणों का चक्रव्यूह रचा लेकिन कांग्रेस ने ओपीएस का हाथ थामे रखा चुनाव परिणाम आए भाजपा हार गई। क्या भाजपा की हार का कारण ओपीएस रहा? भाजपा इस हार की तह तक जाने के लिए ग्राम परिवेश ने चुनाव में टिकट आवंटन से लेकर चुनाव अभियान में बनती बिगड़ती वस्तुस्थिति व आंकड़ों को खंगाला ।इस जांच पड़ताल में रोमांचित तथ्य सामने आए। जो तथ्य सामने आए वह यह इंगित करते हैं कि कांग्रेस की जीत में तो ओ पी एस की बहुत बड़ी भूमिका रही परंतु भाजपा की हार में ओ पी एस का शून्य रोल रहा। बात आश्चर्यजनक है परंतु पूर्ण सत्य है।

भाजपा की टिकट आवंटन में भारी चूक

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हिमाचल के चुनाव से पूर्व भारतीय जनता पार्टी की हाईकमान आधा चुनाव प्रत्याशियों के चयन करने में ही जीत लेती थी। भाजपा की रीत रही है की किसी चुनाव से 2 वर्ष पूर्व ही मौजूदा (सिटिंग) विधायकों व मंत्रियों का पूरा ब्यौरा ले लेती है और कमजोर व हारने वालों को घर का रास्ता दिखा देती रही है। ऐसा ही कुछ हिमाचल प्रदेश में भी किया बल्कि हिमाचल में अन्य राज्यों से अधिक किया हाईकमान ने अंतिम क्षणों में अपने ब्लॉक स्तर के पदाधिकारियों से प्रत्याशियों के बारे में सारी जानकारी गुप्त वोट द्वारा ली और मत बेटियों को हेलीकॉप्टर द्वारा दिल्ली ले जाया गया परंतु हाईकमान की यह कसरत नाकाम रही इस कसरत के नाकाम रहने के पीछे कारण था स्थानीय नेताओं के पूर्वाग्रह।

हिमाचल प्रदेश में हमीरपुर संसदीय क्षेत्र से भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा केंद्र में सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल राज्यसभा सांसद सिकंदर सिंह व प्रदेश भाजपा संगठन मंत्री पवन राणा यद्यपि उनका जिला कांगड़ा है परंतु फिर भी उनका टिकट आवंटन मैं उनका हस्तक्षेप रहा. क्योंकि हमीरपुर संसदीय क्षेत्र में 2 विधानसभा क्षेत्र कांगड़ा जिले के भी हैं पवन राणा ज्वालामुखी के पूर्व विधायक रमेश धवाला व देहरा के पूर्व विधायक व पूर्व मंत्री रविंद्र रवि को टिकट नहीं देना चाहते थे परंतु इन दोनों को पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल चुनाव लड़ाने के हक में थे।

पवन राणा, जिनका का गृह क्षेत्र ज्वालाजी है ,रमेश धवाला को किसी भी स्थित में यहां से टिकट नहीं देने के हक में नहीं थे अतः दोनों पक्षों मे संतुलन बैठाते हुए धवाला व रवि की सीटें बदली गई और दोनों हारे ज्वालाजी से एक चौधरी बिरादरी का उम्मीदवार खड़ा हुआ जिसे धवाला की चाल समझा गया और रविंद्र रवि चुनाव हार गए और देहरा से रमेश इसलिए हार गए की पूर्व विधायक होशियार सिंह जो भाजपा में शामिल हुए थे लेकिन टिकट ना मिलने पर निर्दलीय खड़े हुए और चुनाव जीत गए। इसी तरह राकेश पठानिया को गृह क्षेत्र से टिकट नाम देकर फतेहपुर से टिकट दी वह भी चुनाव हार गए बड़सर व हमीरपुर में भी नेताओं के पूर्वाग्रहों के कारण कमजोर प्रत्याशियों को मैदान में उतारा और हारे अगर सूत्रों की माने तो शिमला शहरी से सुरेश भारद्वाज को कुसुमपट्टी भेजने के पीछे भी पवन राणा की ही मंशा रही सुरेश भारद्वाज को कुसुंमपट्टी भेज भाजपा ने शिमला शहरी और कुसुंमपट्टी विधानसभा क्षेत्रों को हारा दिया।

11 बागियों के कारण हारी भाजपा

भाजपा की हार का कारण रहा बागियों की बड़ी फौज। नेताओं के बार-बार आग्रह करने के बाद भी बागी मैदान में डटे रहे और भाजपा की हार का कारण बने। भाजपा के लगभग 25 बागी मैदान में रहे जिनमें से 11 बागियों ने भाजपा को हराने की बड़ी भूमिका निभाई सबसे ज्यादा बागी कांगड़ा जिले से रहे। कांगड़ा जिला के इंदौरा चुनाव क्षेत्र से भाजपा के प्रत्याशी ने कुल 28547 वोट लिए और बागी उम्मीदवार ने 4422 लिए कुल मिलाकर भाजपा का वोट कांग्रेस के जीते उम्मीदवार से 2172 ज्यादा बना इसके बाद 13वीं विधानसभा में निर्दलीय विधायक होशियार सिंह ने 14वीं विधान सभा के चुनाव से कुछ महीने पहले भाजपा शामिल हो गए परन्तु भाजपा का टिकट न मिलने पर पुनः आजाद चुनाव लड़ा और 22997 वोट लेकर विजय हुए। कांगड़ा जिला की धर्मशाला सीट से सेटिंग विधायक की टिकट कटी और यहां से बागी ने चुनाव लड़ा।

भाजपा बागी ने 7416 वोट हासिल किए जबकि भाजपा प्रत्याशी ने 24830 वोट प्राप्त किए दोनों के मिलाकर देखें तो भाजपा ने कुल 31454 वोट हासिल किए जो कांग्रेस प्रत्याशी के कुल वोटों से काफीअधिक थे। कुल्लू सीट पर बागी उम्मीदवार राम सिंह ने 11937 वोट लिए और भाजपा प्रत्याशी ने 26183 दोनों के वोट योग बना 38120 जो कांग्रेस के जीते उम्मीदवार से 8000 से ऊपर है हमीरपुर जिला में भाजपा ने 5 में से 3 सीटें बागियों के कारण हारी हमीरपुर सदर से भाजपा के बागी जो 2 दिन के लिए कांग्रेस में आए परंतु टिकट ना मिलने पर निर्दलीय चुनाव लड़ा और 25916 वोट लेकर जीते।

भोरंज विधान सभा क्षेत्र से बागी उम्मीदवार ने 6861 बोट लिए जबकि भाजपा उम्मीदवार मात्र 60 वोट से हारा बड़सर सीट पर बागी उम्मीदवार ने 15252 मत हासिल किए और भाजपा प्रत्याशी ने 16501 जबकि कांग्रेस को कुल वोट 30293 मिले जो दोनों के कुल योग से कम हैं सोलन जिला के नालागढ़ से भाजपा के बागी क एल ठाकुर ने भारी मतों से जीत दर्ज की शिमला जिले के ठियोग चुनाव क्षेत्र से भाजपा के बागी प्रत्याशी इंदू वर्मा ने 13848 बोर्ड लिए और भाजपा के उम्मीदवार ने 14178 इसी तरह किन्नौर में बागी उम्मीदवार तुरंत नेगी ने 8574 और भाजपा के उम्मीदवार ने 13730 वोट लिए अगर भाजपा समय रहते स्थानीय नेताओं ,जो केन्द्रीय राजनीति के धुरी भी हैं, के पूर्वाग्रह और अहंकार के घोड़ से नीचे उतर कर जमीनी हकीकत समझ लेती और बागी उम्मीदवारों को बैठा लेती तो रिवाज भी बदल देती और ओपीएसके बवाल को भी समेट देती।

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