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Lok Sabha election 2024 : 6 लोकसभा सीटों से सहयोगियों को कैसे संतुष्ट करेगी बीजेपी?

Lok Sabha election 2024:- अब राज्यसभा चुनाव के बाद भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) अब लोकसभा चुनाव की तैयारियों में जुट गई है। बीजेपी अब एनडीए के सहयोगी दलों के साथ मिलकर सीट शेयरिंग के साथ-साथ ही उम्मीदवार चयन करने में जुट गई है। दरसल, यूपी के पिछले विधानसभा चुनाव को देखा जाए तो अनुप्रिया की पार्टी को 12 सीटों पर जीत मिली थी। राष्ट्रीय लोक दल की बात कि जाए तो उन्हें आठ सीटों पर जीत हासिल हुई थी और एक सीट उपचुनाव में जीती थी। इसे दिखे तो आरएलडी के नौ विधायक थे। ओमप्रकाश राजभर और संजय निषाद की पार्टी को भी छह-छह सीटों पर जीत हासिल हुई थी। इस बार के लोकसभा चुनाव कि बात कि जाए तो सभी पार्टिया अपने फूल जोश में चल रही है। बाजेपी के शीर्ष नेताओं की भी बैठक चल रही है। कल की बैठक के दोरान यूपी में सीट शेयरिंग के फॉर्मूले पर भी चर्चा हुई। खबर है कि बीजेपी यूपी की 74 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी में है और पार्टी सूबे की छह सीटें सहयोगी दलों के लिए छोड़ने को तैयार है।

किस आधार पर हैं सीट शेयरिंग का यह फॉर्मूला?

बीजेपी एनडीए के चार सहयोगी दलों को यूपी की आधा दर्जन सीटों पर एडजस्ट करने की तैयारी में है। अब इस सीट शेयरिंग के इस फॉर्मूले को देख कई सवाल उठ खडे हुए है। चार पार्टियां छह सीटों पर कैसे एडजस्ट होंगी, इसे लेकर चर्चा इसलिए हो रही है क्योंकि अनुप्रिया पटेल की पार्टी अपना दल दो चुनाव से दो लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ती आई है तो वहीं ओमप्रकाश राजभर की पार्टी भी दो से तीन सीटों पर चुनाव लड़ती रही है। निषाद पार्टी दो से तीन लोकसभा सीटें चाहती है तो वहीं हाल ही में विपक्षी इंडिया गठबंधन से नाता तोड़कर बीजेपी के साथ आए जयंत चौधरी की आरएलडी सपा के साथ आधा दर्जन से अधिक सीटों पर चुनाव लड़ती थी। बीजेपी के साथ गठबंधन में आने से पहले आरएलडी का इस बार भी सात सीटों पर चुनाव लड़ना तय था। सपा के साथ सीट शेयरिंग का ऐलान भी हो गया था।  अगर सीट शेयरिंग के फॉमूले की बात की जाए तो पांच विधायक पर एक सीट के फॉर्मूले को आधार बनाकर देखा जा सकता हैं । ओमप्रकाश राजभर और संजय निषाद की पार्टी के हिस्से एक-एक, अनुप्रिया की पार्टी के हिस्से दो और आरएलडी के हिस्से दो सीटें ही आएंगी। हालांकि, अभी तक बीजेपी या उसके सहयोगी दलों की ओर से सीट शेयरिंग या सीट शेयरिंग फॉर्मूले को लेकर कोई बयान नहीं आया है।

किस रणनीतियों के तहत सहयोगी दलों को एडजस्ट किया जाएगा?

आंकड़ों की नजर से देखें तो सीट शेयरिंग के इस फॉर्मूले का आधार 2022 के यूपी चुनाव प्रदर्शन में नजर आता है. इसे इस तरह भी समझा जा सकता हैं कि यूपी विधानसभा की कुल सदस्य संख्या 403 है और लोकसभा की सीटें 80 यानि पांच विधानसभा सीटों पर एक लोकसभा सीट। यूपी में सीट शेयरिंग का आधिकारिक ऐलान अभी नहीं हुआ है लेकिन छह लोकसभा सीटों पर सहयोगियों को एडजस्ट करने की रणनीति पर बीजेपी मंथन कर रही है तो उसके पीछे भी यही गणित नजर आता है। यह भी कहा जा रहा है कि बीजेपी सहयोगियों को लोकसभा की कम सीटों पर एडजस्ट कर रही है तो हो सकता है कि राज्यसभा से लेकर कैबिनेट और निगम-बोर्ड में प्रतिनिधित्व दे सकती हैं। लेकिन राजनीतिक विश्लेषक अमिताभ तिवारी की राय अलग है। उनका कहना है कि हमें नहीं लगता कि बीजेपी ऐसा कुछ करने वाली है। क्योंकि जितनी जरूरत बीजेपी को है इन नेताओं कि उससे ज्यादा जरूरत इन नेताओं को बीजेपी के साथ की हैं। क्योंकि पिछली बार जयंत चौधरी अपनी सीट तक नहीं जीत पाए। ऐसे में उनके लिए अब एक तरह से वजूद की लड़ाई है। इन सबका आकलन जयंत ने पहले ही किया होगा की बीजेपी में उन्हें अधिक सीट नहीं मिलेगी।

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